तो तू है शुमार हुस्न के मेयारों में,
यूँ तो तू है इक ही महजबीं हजारों में,
तेरे गेसू, तेरी पलकें, तेरी आँखों का रंग,
तेरी गर्दन, तेरे झुमके, तेरे हंसने का ढंग,
तू जो शरमाए तो मौसम का हुनर फ़ीका हो,
इससे पहले भी ये शायद किसीने लिख्खा हो,
ऐसा मजबूर हूँ के सब चुराए बैठा हूँ,
मैं तुझे इस कदर ख़ुदा बनाए बैठा हूँ...!
तेरी पाज़ेब की कड़ियों में जुबाँ अटकी है,
तू जरा चल के उसे बातें बहुत करनी है,
क्यों गला घोंट रही हो मेरे अल्फ़ाज़ों का?
और कब तक मैं सितम सह लूँ इन नाज़ों का?
अपनी एडी से कहो ऐसे न दिल को कुचले,
और उस दिल से कहो के मेरे दिल को रख ले,
के मेरी जाँन, मेरा दिल लगाए बैठा हूँ,
मैं तुझे इस कदर ख़ुदा बनाए बैठा हूँ...!
उसने डर डर के कहा सुन तेरे आशिक़ की सदा,
एक आशिक़ के लिए बात बड़ी होती ये,
तेरी सूरत, नजरअंदाज उसे कर भी लूँ,
माना कुदरत कि वो सौग़ात बड़ी होती है,
मैं तुझे प्यार करू बस मेरी ये ख्वाहिश है,
तू है नेमत, है अता, और तू नवाज़िश है,
मैं तेरे अक़्स को ख़ुद में समाए बैठा हूँ,
मैं तुझे इस कदर ख़ुदा बनाए बैठा हूँ...!
( Dedicated to most sincere and caring girl, Yuveeka Jahagirdar. You are my bundle of joy, You have a amazing sense of humor, you are reason behind my urdu love.you are the precious one.. i know you are expecting an essay, but I am tired, Now, you are officially engaged with prasad , but you are still my crush.. love you and happy birthday..)
क्या खुब लिखा है |
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